भसिंडे की खेती होगी या फिर बनेगा पर्यटन हब—श्री हिंदी प्रेम सभा की सहमति पर टिका गिरीताल का 31.63 करोड़ का सपना

काशीपुर। (विकास गुप्ता) काशीपुर के पौराणिक और ऐतिहासिक गिरी सरोवर (गिरीताल) के कायाकल्प की दिशा में उठाया गया 31.63 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी कदम अब पूरी तरह श्री हिंदी प्रेम सभा की सहमति पर निर्भर है। गिरीताल के संचालन और संरक्षण से जुड़ी यह संस्था यदि सौंदर्यकरण और रखरखाव के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देती है, तो गिरीताल आने वाले वर्षों में काशीपुर की पहचान और शान का सबसे बड़ा प्रतीक बन सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद नगर निगम काशीपुर के मेयर दीपक बाली और उनकी टीम ने गिरीताल के सौंदर्यकरण को लेकर ठोस खाका तैयार कर लिया है। पूर्व में इसके लिए मात्र साढ़े चार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन उस राशि में व्यापक विकास संभव नहीं था। ऐसे में महापौर दीपक बाली के विशेष अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गिरीताल को आधुनिक और भव्य स्वरूप देने में धन की कोई कमी आड़े नहीं आएगी। इसी निर्णय के बाद इसकी डीपीआर बढ़ते-बढ़ते 31.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
8 जोन में विकसित होगा गिरीताल
प्रस्तावित योजना के तहत गिरीताल को 8 अलग-अलग जोन में विकसित किया जाएगा। इनमें पार्किंग एरिया, आकर्षक वॉटर फाउंटेन, मॉर्निंग वॉक के लिए ट्रैक, साइकिलिंग ट्रैक, थिएटर झील, जंगल ट्रैक, सुंदर लाइब्रेरी, इको टूरिज्म सुविधाएं, जिम एवं योग केंद्र, बच्चों के लिए प्ले जोन, रेस्टोरेंट और सखीहाट जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
भविष्य में जहां भसिंडे की खेती होती थी, वहां अब नौकाएं चलती दिखाई देंगी और रंग-बिरंगे फाउंटेन गिरीताल की सुंदरता को नया आयाम देंगे।
श्री हिंदी प्रेम सभा की भूमिका निर्णायक
गिरीताल के सौंदर्यकरण की यह पूरी योजना तभी साकार हो पाएगी, जब इसे संचालित करने वाली श्री हिंदी प्रेम सभा नगर निगम को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान करेगी। नगर निगम और शासन दोनों स्तरों पर यह माना जा रहा है कि सभा यदि व्यापक जनहित और शहर के भविष्य को देखते हुए सकारात्मक निर्णय लेती है, तो गिरीताल का कायाकल्प ऐतिहासिक मिसाल बनेगा।
पांडव काल से जुड़ा पौराणिक जलस्रोत
काशीपुर शहर के मध्य स्थित गिरीताल लगभग 13 एकड़ भूमि में फैला एक प्राकृतिक जल निकाय है, जिसकी उत्पत्ति पांडव काल से जुड़ी मानी जाती है। यह ताल सैकड़ों वर्षों तक आसपास की कृषि भूमि के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन रहा।
1980 के दशक में फिका नदी के माध्यम से इसे जसपुर स्थित तुमरिया बांध की कुलवा से जोड़ा गया था, लेकिन बीते वर्षों में इसके प्रवेश और निकासी द्वार निष्क्रिय हो गए और ताल ठोस कचरे से प्रभावित होता चला गया।
काशीपुर को होंगे बड़े लाभ
गिरीताल के कायाकल्प से काशीपुर को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा और शहरवासियों को स्वास्थ्य, मनोरंजन व सुकून का एक भव्य केंद्र मिलेगा।
सबकी निगाहें अब श्री हिंदी प्रेम सभा के निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि गिरीताल का यह सपना कागजों से निकलकर हकीकत बनेगा या नहीं।

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