वंदे मातरम् की गूंज के साथ काशीपुर में जीवित है आज़ादी की विरासत, ऐतिहासिक नीम के पेड़ से निकली प्रभात फेरी

काशीपुर।( सिटी न्यूज काशीपुर)
वंदे मातरम्… भारत माता की जय… इन गगनभेदी नारों के साथ जब भोर की पहली किरण काशीपुर की धरती को छूती है, तब नगर का ऐतिहासिक नीम का पेड़ एक बार फिर आज़ादी के संघर्ष का साक्षी बन जाता है। इसी पावन स्थल से प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकलने वाली प्रभात फेरी काशीपुरवासियों के दिलों में देशभक्ति की अलख जगाती है।
हर साल इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर सुबह छह बजे नगर के लोग हाथों में तिरंगा थामे, राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत होकर ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। मौसम कैसा भी हो—कड़ाके की ठंड हो या झमाझम बरसात—देशभक्ति का जज्बा हर कठिनाई पर भारी पड़ता है और लोग घरों से निकलकर प्रभात फेरी में पूरे उत्साह के साथ शामिल होते हैं।
प्रभात फेरी यहां से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरती हुई पुनः उसी स्थान पर आकर संपन्न होती है। इस दौरान देशभक्ति गीतों और गगनभेदी नारों से पूरा नगर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग जाता है।
प्रभात फेरी के संयोजक विमल गुड़िया ने बताते है कि काशीपुर में इस प्रभात फेरी की परंपरा आज़ादी से पहले की है। अंग्रेजी शासन के दौरान देशवासियों में स्वतंत्रता का जज्बा भरने के लिए इस प्रकार की प्रभात फेरियों का आयोजन किया जाता था। काशीपुर में भी आज़ादी से कुछ वर्ष पूर्व इस परंपरा की शुरुआत हुई, जब लोग सुबह-सुबह गलियों में घूमकर देशभक्ति के गीत गाते और जनता को आज़ादी के आंदोलन से जोड़ते थे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में देश आज़ाद हो गया, लेकिन यह परंपरा नहीं टूटी। आज़ादी के बाद से लेकर आज तक निरंतर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह प्रभात फेरी निकाली जा रही है।
आज भी यह प्रभात फेरी काशीपुर के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि शहीदों के बलिदान, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रप्रेम की जीवित विरासत है, जो हर पीढ़ी को देश के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाती है।

 

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