
काशीपुर (सिटी न्यूज काशीपुर/ विकास गुप्ता)। आखिर चुनाव जीतने के बाद आज वह दिन आ गया जब दीपक बाली शपथ लेकर काशीपुर के प्रथम नागरिक बन कुर्सी पर विराजमान होंगे। इस कुर्सी पर विराजमान होते ही उनके सामने होगा, काशीपुर की जनता को दिए गए संकल्पों को पूरा करने की चुनौती। खास तौर पर उन्हीं संकल्पों में से एक वह संकल्प जो काशीपुर की जनता पर बोझ बना हुआ है। जी हां हम बात कर रहे है दो प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क को समाप्त करने का संकल्प।आज शपथ के बाद नवनिर्वाचित बोर्ड की पहली बैठक में क्या यह संकल्प पूरा हो पाएगा, क्या दीपक बाली अपने वादे पर खरे उतरेंगे, इसी को लेकर आज काशीपुर की जनता की निगाह टिकी रहेगी।
क्या है दाखिल खारिज शुल्क
वर्ष 1998 में तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश मेहरोत्रा ने नगरपालिका की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की थी जिसके अंतर्गत नगरपालिका क्षेत्रांतर्गत किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद पर क्रेता को उस प्रॉपर्टी के नगरपालिका के दाखिल खारिज में प्रॉपर्टी की सरकारी कीमत का दो प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क के रूप में देना होता था। उनके द्वारा शुरू की गई इस व्यवस्था से जहां नगरपालिका की आय बढ़ने लगी तो वहीं जनता पर एक बड़ा बोझ भी आ गया।
चुनावी मुद्दा बना पर नहीं हो पाया आज तक समाप्त
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद कई बार नेताओं ने इस शुल्क को समाप्त करने या कम करने के वादे किए परन्तु कोई भी इसे पूरा नहीं कर पाया। 2013 में नगर निगम बनने के बाद तो यह सिर्फ चुनावी मुद्दा बन कर रह गया। चुनाव जीतने के बाद दो बार मेयर रही ऊषा चौधरी भी इसे नहीं समाप्त कर पाई। इसके पीछे कुछ कानूनी अड़चनों को बताया गया। हाल ही में हुए निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस दोनों ने ही इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। जहां भाजपा प्रत्याशी दीपक बाली ने पहली बोर्ड बैठक में इसे समाप्त किए जाने की घोषणा की थी तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी संदीप सहगल ने इस शुल्क को कम करने का वादा किया था।
क्या दीपक बाली का यह संकल्प हो पाएगा पूरा
मेयर बनने से पूर्व दीपक बाली ने इस दाखिल खारिज शुल्क को पहली बोर्ड बैठक में ही समाप्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कई बार कहा था कि वह इसे समाप्त कर देंगे और जनता पर बोझ नहीं डालेंगे उनके इसी संकल्प को आज पूरा होना है, आज काशीपुर वासियों की निगाह इसी पर बनी हुई है।