
“दीये बुझ जाते हैं, रौशनी छोड़ जाते हैं,
कुछ लोग चले जाते हैं, पर विचार छोड़ जाते हैं…”
काशीपुर ( विकास गुप्ता)। काशीपुर की राजनीति का एक सशक्त, ईमानदार और संघर्षशील अध्याय मौन हो गया।
वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप पैगिया जी का कल निधन हो गया। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि भाजपा की उस पीढ़ी का अवसान है जिसने संघर्ष के दौर में पार्टी का झंडा थामे रखा और विपरीत परिस्थितियों में भी झुकना स्वीकार नहीं किया।
करीब पचास वर्षों तक प्रदीप पैगिया जी काशीपुर की राजनीति में भाजपा के मजबूत स्तंभ बनकर खड़े रहे। 80 के दशक का वह दौर, जब भाजपा राजनीतिक रूप से संघर्ष कर रही थी, उस समय काशीपुर में एडवोकेट के.के. अग्रवाल, प्रदीप पैगिया, चिमनलाल छाबड़ा, मदनलाल गुप्ता जैसे समर्पित कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ भाजपा का झंडा थामे खड़े थे।
80 के दशक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब काशीपुर सीट से भाजपा ने पहली बार योगराज पासी को प्रत्याशी बनाया, तब इस विशाल विधानसभा क्षेत्र—काशीपुर, जसपुर, बाजपुर और गदरपुर—में चुनाव की कमान प्रदीप पैगिया जी और उनकी टीम को सौंपी गई। उन्होंने अपने सक्रिय साथियों और कार्यकर्ताओं के साथ पूरे जोश, रणनीति और समर्पण के साथ चुनाव लड़ाया।
कांग्रेस के वर्चस्व वाले उस दौर में उन पर कई बार कांग्रेस में शामिल होने का दबाव डाला गया, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। कुछ समय पूर्व हुई बातचीत में उन्होंने मुझसे गर्व से कहा था— “मुझे भाजपाई होने पर गर्व है।”
यह वाक्य उनके जीवन, उनकी राजनीति और उनकी निष्ठा का सार था। 1985 के विधानसभा चुनाव में जब पूर्व मुख्यमंत्री स्व. एन.डी. तिवारी काशीपुर सीट से मैदान में थे, भाजपा ने एडवोकेट के.के. अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया। उस कठिन मुकाबले में प्रदीप पैगिया जी ने एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह रणनीति तैयार की। परिणामस्वरूप भाजपा को दस हजार वोट मिले—जो उस समय भाजपा का पहली बार इस सीट पर सर्वाधिक मत प्रतिशत था।
इन्हीं खाटी भाजपा नेताओं की कड़ी मेहनत, तपस्या और पार्टी के प्रति अडिग निष्ठा का परिणाम रहा कि भाजपा ने काशीपुर में अपने पैर मजबूती से जमाए। यही कारण है कि 1985 के बाद इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस आज तक जीत दर्ज नहीं कर सकी।
प्रदीप पैगिया जी वैश्य समाज से थे और काशीपुर के प्रमुख व्यापारियों में गिने जाते थे। वे अनेक सामाजिक व व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़े रहे और हर भूमिका में अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और समर्पण की छाप छोड़ी।
आज भाजपा का यह मजबूत स्तंभ संसार छोड़कर हमेशा के लिए रुखसत हो गया। उनके निधन से काशीपुर की राजनीति में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक जगत में भी शोक की लहर है।
प्रदीप पैगिया जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं,
लेकिन उनकी विचारधारा, उनका संघर्ष और भाजपा के प्रति उनका समर्पण
हमेशा काशीपुर की राजनीति को दिशा देता रहेगा