मात्र 3 साल और 3 महीने के राजनीतिक सफर में दीपक बाली बन गए काशीपुर के मेयर, जानिए उनके इस राजनीतिक सफर व संघर्ष की दास्तां

19 अक्टूबर 2020 को आम आदमी पार्टी में शामिल होकर की थी राजनीति की शुरुआत

काशीपुर (सिटी न्यूज काशीपुर/विकास गुप्ता)। बीती 25 जनवरी को निकाय चुनाव की मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में दीपक बाली ने जीत दर्ज कर कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए, एक तरफ जहां दीपक बाली सबसे कम उम्र के काशीपुर मेयर बने तो वहीं मात्र 3 साल और 3 महीने के राजनीतिक कैरियर में उन्होंने कई ऊंचाइयों को छू लिया।आइए दीपक बाली के इस अल्प राजनीतिक सफर पर नजर डालते है।

प्रारंभिक जीवन परिचय

दीपक बाली का जन्म 26 जनवरी 1973 को काशीपुर के प्रतिष्ठित व्यवसाई रतन लाल बाली के यहां हुआ। दीपक बचपन से ही बहुत मृदुभाषी व मिलनसार थे। प्रारंभिक शिक्षा काशीपुर के सरस्वती शिशु मंदिर व गीता बाल मंदिर स्कूल में हुई उसके पश्चात उन्होंने बारहवीं तक की शिक्षा उदयराज हिन्दू इंटर कॉलेज से प्राप्त की। उसके उपरांत उन्होंने स्नातक की शिक्षा के लिए राधे हरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रवेश लिया। कॉलेज में प्रवेश के साथ ही वह छात्र राजनीति में कूद गए और मात्र 18 वर्ष की आयु में छात्र संघ उपसचिव पद पर चुनाव लड़ा, इस चुनाव में वह बहुत कम अंतर से हार गए। उसके उपरांत उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उन्होंने भागीदारी की जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। राज्य आंदोलनकारी दीपक बाली के पिता रतन लाल बाली उन्हें इंजीनियर या डॉक्टर बनाना चाहते है पर दीपक बाली को अपने लकड़ी के व्यवसाय में रुचि थी। यही वजह थी कि उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बटाना शुरू कर दिया। कुछ वर्ष बाद वह रियल स्टेट के कारोबार से जुड़ गए जहां उन्होंने अपने को एक सफल व्यवसाई के रूप में पहचान दिलाई। दीपक बाली को हमेशा ही कुछ नया करने की ललक रहती थी यही वजह थी कि वर्ष 2012 में उन्होंने डी बाली मूवीज के बैनर तले फिल्म अभिनेता आनंद बलराज के निर्देशन में “दाल में कुछ काला है” फिल्म का निर्माण किया।

दीपक बाली का राजनीतिक सफर की पूरी कहानी______________________________


दीपक बाली हमेशा से ही समाज के लिए कुछ नया व बेहतर करने की सोच रखकर आगे बढ़ते रहे है। इसी सोच के चलते उन्होंने कोरोना के समय काशीपुर में रसोई चलाने के साथ ही एलडी भट्ट चिकित्सालय में कोरोना महामारी में मरीजों के लिए अपने खर्चे से इलाज की व्यवस्था की। इस दौरान दीपक बाली ने 19 जून 2020 में पत्रकार विकास गुप्ता द्वारा लिए गए एक साक्षात्कार के दौरान राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की। साक्षात्ककार  में उन्होंने कहा कि यदि वह राजनीति में आए तो वह सेवा भाव के लिए आयेंगे इसके बाद  बिजनेस नहीं करेंगे सिर्फ राजनीति करेंगे साथ ही राजनीति में आने के निर्णय को लेने के लिए वह धर्मपत्नी उर्वशी बाली से विचार करेंगे। इस साक्षात्कार के कुछ दिन बाद दीपक बाली ने राजनीति में आने का निर्णय लिया और वह दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष 19 अक्टूबर 2020 को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। दीपक बाली के पार्टी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें उत्तराखंड प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी से नवाजा साथ ही काशीपुर विधानसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी भी बनाया। दीपक बाली ने पूरे प्रदेश में आम आदमी पार्टी का झंडा बुलंद करते हुए पार्टी के लिए कार्य करना शुरू किया। इस दौरान हुए विधानसभा चुनाव में वह काशीपुर सीट से लड़े। चुनाव में वह हार गए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी काबिलियत को देख आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें 29अप्रैल 2022 को उत्तराखंड आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। दीपक बाली मात्र डेढ़ साल के राजनीतिक सफर में ही एक बड़े राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष बनने में कामयाब हो गए। अभी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाले कुछ ही दिन हुए थे कि उन्होंने अपने करीबी व सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आग्रह पर भाजपा में शामिल होने का निर्णय ले डाला और जून 2022 में वह आम आदमी पार्टी को बाय बाय कर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में आने के बाद दीपक बाली को स्थानीय भाजपा नेताओं का विरोध भी झेलना पड़ा इसी के चलते वह कुछ दिनों तक चुप्पी साधे रहे। दीपक बाली की यह चुप्पी ज्यादा दिन नहीं रही वह सितंबर 2022 में पार्टी में सक्रिय हो गए और पार्टी कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर भागीदारी करने लगे। दीपक बाली की लगातार सक्रियता से वह पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच पहचान बनाने में कामयाब रहे। दीपक बाली धीरे धीरे भाजपा में एक बड़ा चेहरा बन गए और वर्ष 2024 में वह मेयर पद के दावेदारों में भी शामिल हो गए। दीपक बाली की उज्ज्वल छवि व उनके राजनीतिक संबंधों के चलते पार्टी ने उनपर भरोसा जताया और वह पार्टी से मेयर पद के उम्मीदवार बनने में कामयाब हुए। दीपक बाली ने अपने बाल सखा व कांग्रेस प्रत्याशी संदीप सहगल से चुनावी संघर्ष किया और बीती 25 जनवरी को जीत हासिल कर काशीपुर का मेयर बनने का गौरव हासिल किया। दीपक बाली मात्र 3 वर्ष 3 माह के अल्प राजनीतिक काल में अपने को एक बड़ी पहचान दिलाने में कामयाब हुए है।

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