दौर बदला और बदल गई काशीपुर राजनीति की तस्वीर, अब इस जोड़ी के इर्द गिर्द दिख रहा है काशीपुर की राजनीति का भविष्य

 

काशीपुर ( सिटी न्यूज काशीपुर/ विकास गुप्ता)। काशीपुर की राजनीती भी समय के हिसाब से बदलती रही है। 1967 में एनडी तिवारी व सत्येंद्र चंद्र गुड़िया की जोड़ी से लेकर वर्तमान समय तक की कई जोड़ियों ने राजनीति ने कई बार करवट बदली। आज सिटी न्यूज काशीपुर आपको काशीपुर की राजनीति की अहम जोड़ियों से रूबरू कराता है

एक दौर था जब काशीपुर की राजनीती का मुख्य केंद्र काशीपुर का हलवाई लेन माना जाता था, ये वो समय था जब केंद्र के साथ ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में थी, उस दौर में पूर्व सांसद रहे स्व सत्येंद्र चंद्र गुड़िया व पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व एनडी तिवारी की जोड़ी नें स्थानीय राजनीति की दिशा तय की। काशीपुर के विकास व यहां की राजनीती को लेकर इन दो नामों की सदैव चर्चा होती है। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी 1967 में कांग्रेस के टिकट से काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्रिपरिषद में उन्हें जगह मिली। इस चुनाव से उन्हें एक अभिन्न मित्र के रूप में सत्येंद्र चंद्र गुड़िया का साथ मिला, दोनों ही नेताओं नें एक दूसरे का साथ पाकर काशीपुर की राजनीति में करीब तीन दशक तक अहम रोल अदा किया। 1989 में केसी बाबा नें निर्दलीय के रूप में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद काशीपुर की राजनीति की तस्वीर बदली और रामनगर रोड स्थित होंडा राजनीति का केंद्र बना जीता इस दौरान उनको साथ मिला उनके राजनीतिक मित्र व सहयोगी मुकेश मेहरोत्रा का। उसके बाद से काशीपुर कांग्रेस की राजनीती में यह जोड़ी अहम किरदार में नजर आई। वर्ष 1991 में राम मंदिर आंदोलन के चलते भाजपा की एंट्री के बाद एक नई जोड़ी नें काशीपुर की राजनीती में प्रवेश किया। नैनीताल लोकसभा सीट पर बलराज पासी व काशीपुर विधानसभा सीट पर राजीव अग्रवाल भाजपा के टिकट पर जीते इस जीत के बाद काशीपुर की राजनीती में एक बड़ा परिवर्तन आ गया, कांग्रेस की राजनीति के साथ ही भाजपा की राजनीति का केंद्र बना माता मंदिर रोड का राजीव कुमार का प्रतिष्ठान। यह वह दौर था जब कांग्रेस की राजनीति रामनगर रोड से चलने लगी तो वही भाजपा की राजनीति माता मंदिर रोड से। उत्तराखंड राज्य के गठन के साथ ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई। राज्य गठन के बाद 2002 में हुए पहले विस चुनाव में भाजपा अकाली दल गठबंधन से चुनाव लड़े अकाली दल के नेता हरभजन सिंह चीमा काशीपुर के विधायक बने तो वही अगले ही साल भाजपा से चुनाव लड़कर ऊषा चौधरी काशीपुर नगर पालिका की चेयरमैन बनी। इसके बाद जहां भाजपा की राजनीति इन्ही दोनों नेताओं के इर्द गिर्द घूमने लगी तो वही कांग्रेस कई खेमों में बटने के बाद छिटक गई। दो दशक तक हरभजन सिंह नें काशीपुर की राजनीति को अपने रामनगर रोड स्थित कार्यालय से चलाया इस दौरान उन्हें राजनीतिक जोड़ी के रूप में ऊषा चौधरी का साथ मिला, परन्तु 2022 में यह तस्वीर तब बदल गई जब हरभजन सिंह चीमा नें अपने सुपुत्र त्रिलोक चीमा को अपनी विरासत सौपने का मन बनाया, उनके इस निर्णय से ऊषा चौधरी नाराज हो गई। इसके बाद काशीपुर भाजपा भी कई खेमों में बट गई। हाल ही में हुए निकाय चुनाव के बाद भाजपा को एक नए नेतृत्व वाली जोड़ी मिली है , यह युवा जोड़ी है विधायक त्रिलोक चीमा व मेयर दीपक बाली की। इन दोनों ही नेताओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी साथ मिला है जिसके चलते काशीपुर वालों को एक बार फिर खासी उम्मीद जगी है। लोगों का मानना है कि यह जोड़ी भी लम्बे समय तक काशीपुर की राजनीति का मुख्य केंद्र बनेगी।

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